भस्म एवं पिष्टी

टंकण भस्म (सुहागा) के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

टंकण भस्म (सुहागा) एक निस्तापित आयुर्वेदिक यौगिक है जिसका निर्माण सुहागा पाउडर से किया जाता है। आयुर्वेद में टंकण भस्म का उपयोग बलगम वाली खांसी, श्वास सम्बन्धी विकारों, घरघराहट वाली ब्रोंकाइटिस, पेट दर्द, कष्टार्तव, बालों में रूसी, दुर्गन्ध युक्त श्वास और दुर्गन्धयुक्त मूत्र के उपचार के लिए किया जाता है।

Contents

घटक द्रव्य (संरचना)

टंकण भस्म का एकमात्र घटक सुहागा है।

रासायनिक संरचना

रासायनिक रूप से, सुहागा का रासायनिक सूत्र Na2B4O7·10H2O है। इसे डाईसोडियम टेट्राबोरेट (disodium tetraborate) या सोडियम टेट्राबोरेट (sodium tetraborate) भी कहा जाता है। टंकण भस्म सुहागा का परिवर्तित रूप है।

औषधीय गुण

टंकण भस्म में उपचार के निम्नलिखित गुण हैं:

  1. कफोत्सारक – प्रमुख गुण
  2. दाह नाशक
  3. वातहर
  4. पाचन उत्तेजक
  5. मूत्रल
  6. आर्तवजनक
  7. आक्षेपनाशक
  8. वसा दाहक
  9. रोगाणुरोधी – यह क्रिया मूत्र संक्रमणों में प्रकट होती है

आयुर्वेदिक गुण

रस कटु, लवण
गुण लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण
वीर्य ऊष्ण
विपाक कटु
दोष कर्म (विकारों पर प्रभाव) कफ (Kapha) और वात (Vata) को शांत करता है
चिकित्सीय प्रभाव – प्रभाव कफोत्सारक
अंगों पर प्रभाव फेफड़े, गर्भाशय, पेट, मूत्राशय

चिकित्सीय संकेत

टंकण भस्म (सुहागा भस्म) स्वास्थ्य की निम्नलिखित स्थितियों में सहायक है:

  • बलगम वाली खांसी
  • घरघराहट के साथ श्वास की समस्याएं
  • छाती में जकड़न
  • ब्रोंकाइटिस
  • पेट में दर्द
  • कष्टार्तव
  • बालों में रूसी
  • दुर्गन्धयुक्त श्वास
  • दुर्गन्धयुक्त मूत्र
  • मूत्र मार्ग में संक्रमण

लाभ और औषधीय उपयोग

टंकण भस्म को मुख्य रूप से श्वास सम्बंधित विकारों में दिया जाता है जब रोगी में निम्न लक्षणों में से कोई भी मौजूद हो।

  1. बलगम (श्लेष्म) का बनना, जो गाढ़ा सफेद या पीले-हरे रंग का हो
  2. घरघराहट के साथ सांस लेने में परेशानी
  3. अधिक बलगम के कारण छाती में जकड़न

टंकण भस्म की संस्तुति करने के लिए ये मुख्य लक्षण हैं। इसे गले में जलन, सूखी (बिना बलगम वाली) खाँसी और लगातार सूखी खांसी आने वाले व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए।

खांसी के साथ बलगम आना

टंकण भस्म में कफोत्सारक गुण होते हैं। यह मोठे और गाढ़े बलगम को पिघला देता है और फेफड़ों से इसे बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे अंततः बलगम वाली खांसी से मुक्ति मिलती है। हालाँकि, खांसी के साथ बलगम आना सिर्फ एक लक्षण है और इसके कई अंतर्निहित कारण हो सकते हैं। अतः किसी भी व्यक्ति को उपचार करते समय सभी कारणों को सुनुश्चित कर लेना चाहिए।

ब्रोंकाइटिस

हालांकि, ब्रोंकाइटिस में अकेले टंकण भस्म लेने से लाभ नहीं मिलता है। सितोपलादि चूर्ण सहित सहित अन्य उपायों की भी आवश्यकता होती है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस में तब किया जाता है जब बलगम गाढ़ा हो और इसे बाहर निकालने में परेशानी हो रही हो।

कष्टार्तव

टंकण भस्म के आक्षेपनाशक गुणों के कारण इसका उपयोग कष्टार्तव के उपचार के लिए किया जाता है। हालांकि, आमतौर पर इसका उपयोग कष्टार्तव के उपचार के लिए नहीं किया जाता है लेकिन जब मासिक धर्म रक्त में ज्यादा थक्के हों तो इसका उपयोग लाभ देता है। ऐसे मामले में, टंकण भस्म के साथ प्रवाल पिष्टी, अशोक चूर्ण और चन्द्रप्रभा वटी का उपयोग करना चाहिए।

बालों में रूसी

नारियल तेल या सरसों के तेल के साथ टंकण भस्म को सिर पर लगाने से रूसी का उपचार करने में मदद मिलती है।

कैसे प्रयोग करें:

  1. रूसी में, आधा चम्मच टंकण भस्म को नारियल तेल में मिलाएं और इसे खोपड़ी पर लगायें। इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए इस मिश्रण में नीम तेल के कुछ बूँदें मिलायें। इसको लगाने से यह खोपड़ी की खुजली को भी कम कर देता है। 3 से 5 मिनट तक इसकी मालिश करें। इसे 15 से 30 मिनट तक लगा कर छोड़ दें और उसके बाद शैम्पू से अपना सिर धो लें।
  2. वैकल्पिक रूप से, टंकण भस्म और नीम के पत्तों के चूर्ण का मिश्रण बनायें। पानी के साथ मिलाकर इसका पेस्ट बनायें और इसे खोपड़ी पर लगा लें। फिर शैम्पू से सिर को धो लें।

सावधानी: टंकण भस्म का उपयोग सप्ताह में दो बार किया जाना चाहिए। टंकण भस्म का अधिक उपयोग करने से बाल कमजोर हो सकते हैं और परिणामस्वरूप बाल झड़ सकते हैं।

मात्रा और सेवन विधि

टंकण भस्म की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

शिशु 10 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर के वजन के बराबर *
बच्चे 50 से 125 मिलीग्राम *
वयस्क (19 से 60 वर्ष) 125 से 500 मिलीग्राम *
वृद्धावस्था (60 वर्ष से ऊपर) 125 से 250 मिलीग्राम *
अधिकतम संभावित खुराक 1000 मिलीग्राम **

* एक दिन में दो बार       ** विभाजित मात्रा में कुल दैनिक खुराक

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के तुरंत बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?)  सह-औषध के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

 उपयुक्त सहौषधि

आम तौर पर, टंकण भस्म को सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna) और शहद के संयोजन में लेना चाहिए।

सुरक्षा प्रोफाइल

टंकण भस्म का अल्पावधि उपयोग (4 हफ्तों से कम) प्रतिदिन दो बार 250 मिलीग्राम से कम मात्रा में संभवतः सुरक्षित और सहनीय है।

दुष्प्रभाव

दीर्घकालिक उपयोग (4 सप्ताह से अधिक) उचित नहीं है। कम मात्रा में खुराक के दीर्घकालिक उपयोग और अधिक मात्रा में खुराक के अल्पकालिक उपयोग के निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

  • अपच
  • भूख में कमी
  • मतली और उल्टी
  • दुर्बलता
  • श्वेतकमेह
  • बाल झड़ना
  • सूजन – सामान्य
  • दीर्घकालिक उपयोग हड्डियों को प्रभावित कर सकता है और हड्डी खनिज घनत्व के नुकसान का कारण बन सकता है।
  • कुछ मामलों में, अल्पकालिक उपयोग भी सीने में या पेट में जलन पैदा कर सकता है।
  • टंकण भस्म का दीर्घकालिक उपयोग अल्पशुक्राणुता का कारण भी हो सकता है।
  • यह महिलाओं में डिंबक्षरण और प्रजनन क्षमता को प्रभावित भी कर सकता है। संभवतः यह हार्मोन को प्रभावित कर सकता है।

विषाक्तता

टंकण भस्म संभावित रूप से विषाक्त नहीं है और इसमें कोई तीव्र विषाक्तता लक्षण नहीं दिखाई देता है। चिकित्सीय खुराक में, यह सुरक्षित और अच्छी तरह से सहनीय है क्योंकि घातक खुराक की तुलना में इसकी मात्रा बहुत कम होती है। शोध अध्ययन के अनुसार पशुओं में टंकण भस्म या सुहागा की घातक खुराक 2.66 ग्राम प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के अनुसार है।

गर्भावस्था और स्तनपान

गर्भावस्था में टंकण भस्म का सुरक्षित होना पूरी तरह से स्थापित नहीं है। टंकण भस्म (सुहागा) अपरा बाधा को पार कर सकता है। इसलिए, गर्भावस्था में टंकण भस्म का दीर्घकालिक उपयोग (2 से 4 सप्ताह से अधिक) भ्रूण के जन्म, वजन, हड्डी या कंकाल विकास को प्रभावित कर सकता है।

सूचना स्रोत (Original Article)

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